ssnews जनपद पंचायत में अजब-गजब खेला! गाड़ी ड्राइवर को बना दिया बाबू, जियो ट्रैकिंग के नाम पर अवैध वसुली,,,
जनपद पंचायत में अजब-गजब खेला! गाड़ी ड्राइवर को बना दिया बाबू
डीएससी बाबू के पास रहने का आरोप, ऑफिस में बैठकर जियो-ट्रैकिंग और राशि जारी करने के मामले ने खड़े किए सवाल
स्वराज संदेश मस्तूरी। जनपद पंचायत मस्तूरी में कामकाज को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। वाहन चालक को कार्यालयीन कार्यों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने के बाद अब ग्राम पंचायतों की राशि जारी करने के लिए इस्तेमाल होने वाली डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं।
कुछ जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि डीएससी, जो संबंधित सचिव सरपंच के पास सुरक्षित रहना चाहिए, वह बाबू के पास रहता है और इसी के माध्यम से ग्राम पंचायतों की राशि जारी की जाती है। यदि यह आरोप सही है तो यह पंचायतों की वित्तीय व्यवस्था और डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर मामला हो सकता है। इसकी निष्पक्ष जांच की होना चाहिए।
ड्राइवर को बाबू की जिम्मेदारी, जियो-ट्रैकिंग का प्रभार
जानकारी के अनुसार, मस्तूरी में पदस्थ जनपद पंचायत सीईओ जे.आर. भगत के साथ स्कॉर्पियो वाहन चलाने वाला ड्राइवर अब जनपद पंचायत में बाबू की तरह काम कर रहा है। आरोप है कि जनपद में पहले से बाबू पदस्थ होने के बावजूद वाहन चालक को महत्वपूर्ण कार्यालयीन जिम्मेदारियां सौंप दी गईं।
इसी के साथ उसे जिला पंचायत, जनपद पंचायत और ग्राम पंचायतों से जुड़े जियो-ट्रैकिंग कार्य का प्रभार दिए जाने की बात सामने आ रही है। जियो-ट्रैकिंग के लिए मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जाना चाहिए, लेकिन संबंधित कार्य कार्यालय में बैठकर किए जा रहे हैं।
पहले भी फर्जी भुगतान का मामला बना था बड़ा सवाल
मामले को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि जनपद पंचायत के मौजूदा सीईओ के अधीनस्थ रहे एक बाबू पर पूर्व में लाखों रुपये की राशि कथित रूप से फर्जी तरीके से जारी करने और स्वयं के नाम पर राशि जारी किए जाने का मामला सामने आने की बात कही जा रही है।
फर्जी तरीके से डीएससी का उपयोग के मामले में तत्कालीन सीईओ और बाबू के जेल जाने की बात भी सामने आई है।
ऐसे में सवाल उठता है कि पूर्व की घटनाओं से सबक लेने के बजाय क्या फिर से पंचायतों की राशि और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर लापरवाही बरती जा रही है?
राशि जारी करने के नाम पर 1 से 2 प्रतिशत लेने का आरोप
कुछ जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि पंचायतों की राशि जारी करने के नाम पर एक से दो प्रतिशत तक राशि लिए जाने का दबाव बनाया जाता है। यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला है।
जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर पंचायतों में पारदर्शिता बनाए रखने की जिम्मेदारी है, उन्हीं के स्तर पर यदि नियमों की अनदेखी के आरोप लगते हैं तो मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी हो जाती है।
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