ssnews ग्रामीण की शिकायत पर खबर छपने से तिलमिलाई तहसीलदार, पत्रकार के खिलाफ थाने में की शिकायत , जनहित का मुद्दा उठाना पत्रकार को पढ़ गया भारी,क्योकि तहसीलदार हैं सरकारी अधिकारी

खबर छपने से तिलमिलाई तहसीलदार, Democrecy.In के पत्रकार के खिलाफ थाने में की शिकायत, इसे कहते है चोरी ऊपर से सीना जोरीं

 स्वराज संदेश बिलासपुर। न्यूज़ पोर्टल democrecy.in में खबर छपने के बाद सीपत तहसीलदार तुलसी राठौर तिलमिला गई है। सीपत तहसील में चल रहे भ्रस्टाचार के जगजाहिर होते ही प्रशासनिक गलियारों में तहसीदार की बेहद किरकिरी हो रही है। केरियर पर खतरा मंडराते देख अपना आपा खो दी है और समाचार लिखने वाले पत्रकार के खिलाफ ही सीपत थाने में लिखित शिकायत कर दी है। तहसीलदार तुलसी राठौर थाने में शिकायत करके अभिब्यक्ति की आजादी को दबाना चाहती है और अपने आपको पाकसाफ साबित करने की कोशिश कर रही है। सीपत के थाना प्रभारी ने लिखित शिकायत की पुष्टि भी की है। पांच जुलाई को न्यूज़ पोर्टल democracy.in में एक खबर प्रकाशित ( वाइरल ) हुई थी। यह खबर शीतला प्रसाद त्रिपाठी के द्वारा कलेक्ट्रेट में तहसीदार और वहां के बाबू के खिलाफ की गई शिकायत के आधार पर लिखी गई थी। शीतला प्रसाद ने सीपत तहसीलदार और वहां के बाबू पर गंभीर आरोप लगाए थे। शीतल प्रसाद ने अपने शिकायत में कहा है कि 26 सितंबर 2019 को दर्राभाठा में 82 डिसमिल जमीन खरीदा था। इसके बाद राजस्व रिकार्ड में नामांतरण करने के लिए 20 जनवरी 2020 को तहसील कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया था। तहसील कार्यालय में प्रकरण दर्ज करने के बाद क्रेता और विक्रेता सभी ने शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया और न्यायालय में बयान दर्ज किए गए। जमीन की खरीदी बिक्री पूरी तरह से अविवादित है। नामांतरण के लिए सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद केवल आदेश होना रह गया था। इसी बीच कोरोना के कारण लॉक डाउन हो गया और तहसीलदार ने आवेदकों की अनुपस्थिति बताकर प्रकरण खारिज कर दी। इसकी जानकारी आवेदकों को तब हुई जब लॉक डाउन समाप्त हुआ और प्रकरण की जानकारी लेने तहसील कार्यालय पहुंचे। इसके बाद आवेदकों ने नए सिरे से आवेदन देकर प्रकरण को फिर से रिस्टोर कराया और सुनवाई के लिए 17 फरवरी 2021 की पेशी दी गई। जब आवेदक 17 फरवरी को तहसील पहुंचे तो कहा गया कि 20 हजार रुपए लेकर आओ तो मामला आगे बढ़ेगा। यही नही आवेदकों से यह भी कहा गया कि हर पेशी में बाबू को भी 5 सौ रुपए देने होंगे वो भी प्रकरण जब तक समाप्त नहीं होगा तब तक देना होगा। पैसे नही देने पर प्रकरण की फाइल गायब कर दी गई है। आवेदकों को पेशी भी नही दिया जा रहा है। तहसील कार्यालय के इस डिमांड से आवेदक सकते में है और काफी दिनों तक मानसिक रूप से परेशान रहा। आवेदकों को कोई रास्ता नही दिखने पर कलेक्टर से शिकायत की और न्याय की गुहार लगाई है।

गौरतलब है कि खबर प्रकाशित होने के बाद तुलसी राठौर ने अपने करीबियों के माध्यम से democracy.in के पत्रकार पर खबर हटाने के लिए काफी दबाव बनाया, लेकिन पत्रकार ने पीड़ित की समस्या को प्राथमिकता देते हुए खबर हटाने से साफ इंकार कर दिया था। इसी के बाद तहसीलदार ने पत्रकार को सबक सिखाने के इरादे से थाने में लिखित शिकायत की है।

कलेक्ट्रेट में कई गई शिकायत की कॉपी

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