ssnews जालसाजी से हासिल की शिक्षिका की नौकरी अफसर हैं मेहरबान, जांच के 21माह बाद भी फर्जी नियुक्ति पर कोई कार्रवाई नहीं,,,,

3 जांच में फर्जीवाड़ा साबित, 3 डीईओ ने डीपीआई के आदेश को दिखाया ठेंगा
तीन-तीन डीईओ बदले, डीपीआई के आदेश के 21 माह बाद भी कार्रवाई शून्य

ऑफिस के अधिकारी और स्थापना शाखा के बाबुओं पर उठे सवाल

जालसाजी से हासिल की शिक्षिका की नौकरी अफसर हैं मेहरबान। 

स्वराज संदेश बिलासपुर।जिले में तीन-तीन डीईओ बदल गए हैं। तब भी डीपीआई के स्पष्ट आदेश के 21 माह बाद भी शिक्षक नेता की शिक्षिका पत्नी की फर्जी नियुक्ति पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। शिक्षा अधिकारी, शिक्षक नेता की पत्नी के प्रति विशेष अनुराग दिखा रहे हैं। इसके कारण जेडी द्वारा कराई गई तीन अलग-अलग जांच में शिक्षिका की नियुक्ति को फर्जी पाए जाने के बाद अब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होना सवाल खड़े कर रही है। इसमें अधिकारी और स्थापना शाखा के बाबुओं की मिलीभगत सामने आ रही है।

मामला विकासखंड बिल्हा के शासकीय प्राथमिक शाला मोपका में पदस्थ सहायक शिक्षक एलबी चंद्ररेखा शर्मा का है। उनके ऊपर फर्जी नियुक्ति और ट्रांसफर आदेश के जरिए नौकरी हासिल करने का आरोप लगा था। उसकी तीन अलग-अलग टीम द्वारा जांच कराई गई। जिसमें नियुक्ति को पूरी तरह से फर्जी पाया गया। जांच अधिकारी ने उसको तत्काल बर्खास्त कर वेतन की राशि की वसूली और कानूनी कार्रवाई करने को कहा था। इसके बाद भी सालों से मामला फाइलों में पड़ा है।

जेडी ने जांच रिपोर्ट डीपीआई को भेजी। वहीं एक अलग से जांच दल गठित किया गया। डीपीआई ने अंतिम मौका देते हुए शिक्षिका को अपना पक्ष रखने के लिए 25 अक्टूबर 2024 और 20 नवंबर 2024 को समन जारी कर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था। हालांकि, शिक्षिका दोनों ही बैठकों से नदारद रहीं। इसके बाद डीपीआई ने आदेश पत्र क्रमांक 178/2023/1200, दिनांक 27-11-2024 जारी किया। जिसमें उन्होंने कहा कि संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग बिलासपुर की प्रतिवेदन अनुसार चंद्ररेखा शर्मा की नियुक्ति प्रमाणित नहीं हुई है और इसकी सक्षम नियुक्ति प्राधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर है। अतः प्रकरण पर डीईओ को विधिसम्मत कार्रवाई कर की गई कार्रवाई से संचालनालय को अवगत कराने के निर्देश दिए गए।

हाईकोर्ट से स्टे नहीं, फिर भी अदालत के नाम पर डाल बना रहे अफसर

विभागीय कार्रवाई से बचने के लिए शिक्षिका ने उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका (डब्ल्यूपीएस नंबर 7374/2024) दायर की थी। लेकिन सच यह है कि उच्च न्यायालय ने इस मामले में कोई स्थगन जारी नहीं किया है। डीपीआई ने भी अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि कोर्ट से कोई स्टे नहीं मिलने के बावजूद शिक्षिका अनुपस्थित रही। इसके बाद भी बिलासपुर शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मामला कोर्ट में है, का बहाना बनाकर फर्जी नियुक्ति को संरक्षण देने में जुटे हुए हैं।

क्या है पूरा मामला?

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रांताध्यक्ष संजय शर्मा की पत्नी चंद्ररेखा शर्मा के खिलाफ फर्जी नियुक्ति संबंधी आदेश के जरिए नौकरी हासिल कर विभाग में 16 सालों से शिक्षक की नौकरी करने की शिकायत हुई थी। इसमें बताया गया कि था कि उन्होंने छह माह की नौकरी के बाद 2007 में पतलूनगांव नगर पंचायत से अपना बदला हुआ बिल्हा जनपद पंचायत के मोपका स्कूल में करा लिया। चंद्ररेखा ने 12वीं तृतीय श्रेणी से परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसलिए शिक्षाकर्मी की नौकरी नहीं लग सकती थी। इसकी जेडी ने तीन अलग-अलग टीम से जांच कराई। जिसमें नियुक्ति को फर्जी पाया गया।

आदेश देख कर करेंगे कार्रवाई

डीपीआई द्वारा चंद्ररेखा शर्मा के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश के संबंध में जानकारी नहीं होने की बात कही जा रही है। अगर ऐसा है तो उक्त आदेश को निकाल कर निर्देशानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।

— अजय कौशिक, डीईओ
Previous article
This Is The Newest Post
Next article

Leave Comments

Post a Comment

Ads Post 1

Ads Post 2

Ads Post 3

Ads Post 4

DEMOS BUY