ssnews माँ बेटी की यही पुकार बचा लो हमारी जान, स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से गई मां बेटी की जान फिर भी अनजान स्वास्थ्य विभाग,,,

स्वराज संदेश बिलासपुर। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से 10 फरवरी को सरकारी अस्पताल नगर पंचायत मल्हार में प्रसव कराने गई प्रसूता और नवजात की सिम्स में हुई मौत के बाद अब क्षेत्र के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर भी सवाल उठ रहा है कि आधी अधूरी संसाधनों के बीच महत्वपूर्ण योजना सफल कैसे होगी। वही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मस्तूरी में विगत 5 वर्ष से पदस्थ बीएमओ भी किसी भी मामले को गम्भीरता से नही लेते जिससे स्वास्थ्य कर्मचारी भी गम्भीर नही है। क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने बीएमओ ने कोई कदम नही उठाए जिसका परिणाम अब सामने आ रहा है। सरकार के तमाम प्रयास व कवायद के बावजूद भी क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं सुधर नही पा रही है। सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना गर्भवती माताओ को करना पड़ रहा है जबकि ग्रामीण क्षेत्रो के अलावा शहरी क्षेत्रों में भी जननी सुरक्षा योजना का बेहतर क्रियान्वय करना स्वास्थ्य विभाग का दायित्व है। परन्तु मस्तूरी क्षेत्र के किसी भी प्राथमिक व उपस्वास्थ्य केंद्रों में महिला चिकित्सक ही नही है, चौकाने वाली बात ये है कि विकास खण्ड मस्तूरी के एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी स्त्री रोग विशेषज्ञ नही है जहां क्षेत्र के सौ से ज्यादा गाँव के लोग इलाज कराने आते है यहां भी ग्रामीण चिकित्सा सहायकों से काम चलाया जा रहा है। वही  क्षेत्र के लोहर्षि के अलावा जोन्धरा, ओखर सहित कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी महिला सहायक भी नही है। जिससे गर्भवती महिलाओं का इलाज ठीक से नही हो पा रहा है। ऐसा ही मामला मस्तूरी विधानसभा के बड़े गावो में शामिल ग्राम पंचायत लोहर्षि जहां की आबादी 10 हजार से भी ज्यादा है यहां विगत कई वर्षों से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है जहां लोहर्षि के अलावा इस सेक्टर के 17 गाँव के 28 हजार मरीज इसी अस्पताल के भरोशे है और इस सेक्टर में 5 उप स्वास्थ्य केंद्र भी है। परन्तु डॉक्टर व स्टाफ की भारी कमी है। लोहर्षि का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एकमात्र पुरुष आरएमए के भरोशे संचालित हो रहा है बाकी के स्टाफ नदारद ही रहते है और विभाग के अधिकारी मूक दर्शक बन लोगो को स्वास्थ्य सुविधा से वंचित कर रहे है। बताया जा रहा है कि इस अस्पताल में पूरा सेटअप है जिसमे एक एमबीबीएस, दो आरएमए, एक फार्मासिष्ट, स्टाफ नर्स के अलावा वार्डब्वाय व आया कि नियुक्ति है परन्तु वे सब कागजो में दिखते है। यहां के एमबीबीएस डॉक्टर की ड्यूटी मस्तूरी में लगाई गई है वही आरएमए महिला भी अब  अटैच होकर मस्तूरी में ड्यूटी कर रही है। जिसके कारण गर्भवती महिलाओं को विभिन्न योजनाओं का लाभ भी नही मिल पा रहा है। लोहर्षि सरपंच रंजीत भानु का कहना है कि यहां के स्वास्थ्य केंद्र में महिला मरीजो के लिए कोई चिकित्सक नही है जिससे उनको दर दर भटकना पड़ता है इस गम्भीर समस्या के लिए सोमवार को बिलासपुर कलेक्टर से मिलकर महिला चिकित्सक की मांग करेंगे।                                         "मल्हार की घटना के सम्बंध में जानकारी मिली है कि प्रसूता महिला का डिलवरी के दौरान खून ज्यादा बह गया था और बच्चे की स्थिति भी ठीक नही थी इसलिए सिम्स रिफर किया गया था, फिर भी मामला गम्भीर है जांच कराएंगे। रही बात लोहर्षि की तो महिला सहायक की मांग की गई है जल्द ही आने की उम्मीद है वही मस्तूरी में स्त्री रोग विशेषज्ञ की भी मांग विभागीय अधिकारियों से की गई है।"......नंदराज कंवर, बीएमओ मस्तूरी।                                             गर्भवती महिलाओं के लिए क्या है मुख्य योजना.... प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व देखभाल की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है जिसके लिए लाभार्थी महिलाओ को प्रत्येक माह की 9 तारीख को प्रसव पूर्व देखभाल, जांच व दवाई दी जानी है जिसके लिए सभी अस्पतालों में महिला विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति भी करनी है और इस योजना का मुख्य उद्देश्य ही यही था कि प्रसव के दौरान मातृ मृत्यु की संख्या कम हो। परन्तु क्षेत्र के किसी भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में महिला विशेषज्ञ चिकित्सक नही है सभी केंद्रों में महिला ग्रामीण चिकित्सा सहायक से ही काम चलाया जा रहा है इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश की सबसे बड़ी योजना का वास्तविक स्थिति क्या होगी।
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