ssnews शिक्षक को गुरु का दर्जा दिया जाता है ,मगर इस गांव के प्राथमिक शाला में पदस्त शिक्षक स्कूल जाना भूल गए
स्कूल में नहीं लगता हैं मोहल्ला क्लास,शिक्षक ने बनाया स्कूल से दूरी
स्वराज संदेश रायपुर पखांजूर। शिक्षक को गुरु का दर्जा दिया जाता है मगर नेलटोला गांव के प्रथमिक शाला में पदस्त शिक्षक स्कूल जाना भूल गए हैं, नतीजा नेलटोला गांव के बच्चों राष्ट्रीय भाषा हिंदी भी बोलना नहीं आता हैं,बच्चों में पढ़ाई लिखाई के गुण तो दूर की बात है।
कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा विकास खण्ड का एक ऐसा स्कूल हैं जहां पदस्त शिक्षक बच्चों का भविष्य को लेकर बिल्कुल गंभीर नही है,दरअसल कोरोना महामारी के चलते शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल बंद कर दिया गया एवं बच्चों को स्कूल भवन के बहार मोहल्ला क्लास लगा कर पढ़ाने का आदेश जारी किया था,मगर नेलटोला के प्रथमिक शाला के बच्चो को मोहल्ला क्लास कभी नसिब नहीं हुआ,वह पदस्त शिक्षक कभी स्कूल ही नहीं पहुचाता हैं ना ही अव तक बच्चों को गणवेश वितरण किया गया,यहाँ स्कूल के बच्चों को राष्ट्रीय भाषा हिंदी भी बोलना नही आता,जबकि स्कूल में पढ़ाये जाने वाले सभी विसय हिंदी में हि हैं,जब शिक्षक ही जिम्मेदारी से पीछे हटने लगे तो बच्चों को कैसे उचित शिक्षा प्राप्त होगा,अति संवेदनशील क्षेत्र का भरपूर फायदा उठा रहे हैं शिक्षक बिना ड्यूटी के ही घर बैठे बैठे हड़प रहे हैं तनख्वाह,खंड शिक्षा अधिकारी अजय कुमार सेन को इस नेलटोला गाँव के स्कूल एव पदस्थ शिक्षक के बारे में कोई जानकारी नही,ऐसे में अधिकारी भी बच्चों की भविष्य पर कितना चिंतित हैं आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं।
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